शहादत की वो सुबह जिसे देश कभी नहीं भूलेगा

14 फरवरी 2019 की दोपहर देश के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमला हुआ। इस कायराना हमले में 40 से अधिक जवान शहीद हो गए। पूरा देश शोक, आक्रोश और गर्व की भावनाओं से भर उठा—शोक इसलिए कि हमने अपने वीर सपूत खो दिए, और गर्व इसलिए कि वे मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे गए।

यह हमला उस समय हुआ जब जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर बढ़ रहा था। विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास का इलाका दहल उठा। इस घटना ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को झकझोर दिया। देशभर में श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित हुईं और हर नागरिक ने एक स्वर में आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

इस हमले के बाद भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंक के खिलाफ उसकी नीति “जीरो टॉलरेंस” की है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ कूटनीतिक प्रयास तेज हुए।

पुलवामा की यह घटना केवल एक आतंकी हमला नहीं, बल्कि देश की एकता और संकल्प की परीक्षा थी। आज भी जब हम उन शहीदों को याद करते हैं, तो सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। उनका बलिदान राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करता है।

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